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Friday, May 16, 2014

TO CHECK FARMERS' SUCIDES

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किसानों में आत्म हत्या का मूल कारण है उसकी खेती में लागत अधिक और बिक्री मूल्य कम । इससे शुद्ध आय कम या बिलकुल न होने के कारण वह आत्महत्या करता है ।वास्तविक लागत जोड़ कर फिर उस पर ५०% लाभ किसानों को देने की घोषणा नरेन्द्र मोदी जी ने चुनावी रैली में की थी ।
              हम बदलता भारत की ओर से इस शासनादेश की शीघ्र माँग करते हैं ।
राज कुमार सचान होरी 
राष्ट्रीय अध्यक्ष --बदलता भारत 

Tuesday, April 29, 2014

दोहे मोदी के

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दोहे मोदी के
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1--मोदी जैसा चाहिये , कुशल प्रशासक आज ।
जो पटेल सा बन करे , राष्ट्र जनों का काज ।।
2--लौह शक्ति सा हो अटल ,हो पटेल का दूत ।
मोदी भारत भूमि का , सच्चा , सुदृढ़ सपूत ।।
3--आज राष्ट्र को चाहिये , एक कुशल सरदार ।
जो सरदार पटेल का , निभा सके किरदार ।।
4--मोदी और पटेल की , बी जे पी की राह ।
कुशल प्रशासक चाहिये, आज देश की चाह ।।
5--सशक्त राष्ट्र के वास्ते , लौह पुरुष की राह ।
मोदी जी अब सज रहे , अजी वाह भइ वाह ।।
राज कुमार सचान "होरी"
वरिष्ठ साहित्यकार, भाजपा नेता,पूर्व प्रशासनिक अधिकारी
राष्ट्रीय अध्यक्ष --"बदलता भारत ", एवं राष्ट्रीय संयोजक -पटेल इंडिया मिशन ,संपादक -पटेल टाइम्स ़ ़email -rajkumarsachanhori@gmail.com
9958788699 , 07599155999


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Tuesday, April 15, 2014

Tweet from RajKumarSachanHori (@Sachanhori)

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RajKumarSachanHori (@Sachanhori) tweeted at 12:07pm - 16 Apr 14:

आसमान में खींचिये, इतनी भव्य लकीर ।
बस तुझसे ही पूछ कर ,खुदा लिखे तक़दीर।।
---राजकुमार सचान "होरी" (https://twitter.com/Sachanhori/status/456320446745432064)

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Friday, March 28, 2014

Raj Kumar Sachan Hori

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भाजपा मुख्यालय उ.प्र. में प्रभारी के साथ राजकुमार सचान "होरी" दिनांक २७ मार्च ।

In debate on SAMACHAR PLUS

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Wednesday, March 26, 2014

आम आदमी की कुंडलिया ---

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आम आदमी की कुंडलिया ---
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आम आदमी नाम रख , फिरते हैं कुछ खास ।
उल्टी पुल्टी चाल से , तोड़ रहे विश्वास ।।
तोड़ रहे विश्वास , सदा परनिन्दा करते ,
संविधान से ऊपर खुद को सदा समझते ।।
लगातार ये बना रहे , माहौल मातमी ।
"होरी" बेहद शर्मिन्दा अब आम आदमी ।।
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राज कुमार सचान "होरी"
www.badaltabharat.com , horionline.blogspot.com





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Sunday, March 23, 2014

मैं भी झेलूं , तू भी झेल

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मैं भी झेलूं , तू भी झेल
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१--लूले अन्धे सत्ताकामी , मैं भी झेलूं ,तू भी झेल ।
प्रजातन्त्र के ये आसामी, मैं भी झेलूं तू भी झेल ।।
२--जब शासन में दु:शासन ,गान्धारी आँखों में पट्टी,
तब तब शकुनी कौड़ी कानी, मैं भी झेलूं तू भी झेल ।
३--गान्धी गान्धी मुख से बोलें सत्य अहिंसा खाकर,
बापू के सुन्दर अनुगामी ,मैं भी झेलूं तू भी झेल ।
४-- जब सत्ता वेश्या बना दी गई होगा क्या ,
सत्ता की औलाद हरामी , मैं भी झेलूं तू भी झेल ।
५--कहता था मत विष घोलो यूँ हृदयों में ,
अब खून बह रहा जैसे पानी ,मैं भी झेलूं तू भी झेल ।
६-- कश्मीर जलेगा , राष्ट्र जलेगा इसी तरह ,
भ्राता हो जब पाकिस्तानी ,मैं भी झेलूं तू भी झेल ।
७--तन मन तार तार होता है होरी का फिर "होरी"
गोदानों की यही कहानी ,मैं भी झेलूं तू भी झेल ।
८-- खण्ड राष्ट्र फिर खण्डित होने का भय "होरी"
दिल्ली जब जब बनी जनानी ,मैं भी झेलूं तू भी झेल ।

राज कुमार सचान "होरी"
www.badaltabharat.com ,horionline.blogspot.com
Email- rajkumarsachanhori@gmail.com


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Wednesday, March 19, 2014