Through lectures of Motivation,Personality Development help people and particularly young generations to achieve success . MAKE IN INDIA and MAKE BY INDIA is my way .PCS(retd) हिन्दी साहित्यकार ,दो दर्जन पुस्तकें ,मंचों में संचालन और काव्यपाठ । सम्पादक -- "होरी" पत्रिका और पटेल टाइम्स www.pateltimes.blogspot.com,www.horiindianfarmers.blogspot.com,www.indianfarmingtragedy.blogspot.com rajkumarsachanhori@gmail.com ,pateltimes47@gmail.com
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Sunday, June 15, 2014
Thursday, June 05, 2014
बदलता भारत
प्रस्तुतकर्ता
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बदलता भारत
::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
{साईं होरी ट्रस्ट (रजि.)द्वारा संचालित }
63, नीति खण्ड ।।। इंदिरापुरम ,ग़ाज़ियाबाद
प्रदेश कार्यालय (उ . प्र .) 11 बसन्त विहार ,मानस सिटी रोड ,इंदिरानगर ,लखनऊ ।
@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@
पुस्तकालय , वाचनालय ,सभागार योजना
---------------------------------------
भूमिका
......
हमारा देश प्राचीनतम संस्कृति का देश है । विश्व में सर्वाधिक बोली,भाषायें संस्कृतियाँ इसी देश भारत में मिलती हैं । विकास की यात्रा में यह परम आवश्यक है कि हम अपनी पहचान , अपना इतिहास सुरक्षित रखें । किसी ने ठीक ही कहा है --------
'यूनान मिश्र रोमां सब मिट गये जहाँ से ,
कुछ हस्ती है हमारी , मिटती नहीं जहाँ से ।'
प्राचीन भारत में भी नालंदा ,तक्षशिला जैसे शिक्षा केन्द्र अपने विश्व प्रसिद्ध पुस्तकालयों के लिये जाने जाते थे जहाँ विदेशी भारी संख्या में विद्याध्ययन के लिये आते थे । हमारा देश विश्व गुरू था ।दुनियाँ में सर्वाधिक पुस्तकें हम प्रकाशित करते थे ,परन्तु कालान्तर में विदेशी आक्रमणों से स्थितियां निरन्तर खराब होती गईं और आज हम पिछड़ गये ।
आइये हम संस्कृति और इतिहास के संरक्षण के लिये देश में प्रभावी अभियान चलायें ।" बदलता भारत " ने आरम्भ की है -----
" पुस्तकालय , वाचनालय ,सभागार योजना"
इस योजना से देश की संस्कृति ,इतिहास के संरक्षण के साथ साथ शिक्षा और ज्ञान के प्रसार तथा विकास और रोजगार में आशातीत लाभ होगा ।
-------------------------
योजना क्या है ?
------------------
देश के प्रत्येक जनपद में कम से कम एक नगरपालिका ,नगरनिगम में उस जनपद के सबसे बड़े साहित्यकार या स्वतंत्रता सेनानी के नाम से एक "पुस्तकालय ,वाचनालय,सभागार "का निर्माण स्थानीय निकाय स्वयं अपने संसाधनों , प्रदेश और केन्द्र से प्राप्त धनराशियों तथा सांसद और विधायक निधियों से पूर्ण कराये जिसमें तीन कक्ष हों ---( 1) पुस्तकालय (2) वाचनालय (3) सभागार ।
पुस्तकालय में साहित्य ,विज्ञान ,अर्थशास्त्र , इतिहास, समाजशास्त्र ,धर्म ,दर्शन ,राजनीतिशास्त्र ,भूगोल आदि आदि के साथ इंजीनियरिंग तथा तकनीकी विषयों और मेडिकल व कम्पटीशन की पुस्तकें , पत्र ,पत्रिकायें भी उपलब्ध रहें जिससे क्षेत्रीय विद्यार्थीगण लाभ उठा सकें ।कोचिंग के स्थान पर प्रतिभावान विद्यार्थी स्वयं अध्ययन करते हैं बसर्ते उन्हें पुस्तकें उपलब्ध हों ।
पुस्तकालय के साथ एक कक्ष वाचनालय हो जिसमें बैठ कर विद्यार्थीगण और नागरिक पुस्तकें और पत्र,पत्रिकायें पढ़ सकें । इन्हीं दो कक्षों के साथ एक बड़ा सभागार होना चाहिये जिसका बहुद्देशीय प्रयोग किया जा सके । सभागार नगर की सांस्कृतिक गतिविधियों का केन्द्र बन सके इस लिये यह कम से कम 100 फ़ीट लम्बा और 60 फ़ीट चौड़ा हो । इस सभागार में क्षेत्र के स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों ,साहित्यकारों तथा अन्य प्रसिद्ध व्यक्तियों के चित्र संक्षिप्त विवरण के साथ लगाये जांय ।
"पुस्तकालय,वाचनालय ,सभागार " जहाँ एक ओर समस्त सांस्कृतिक , साहित्यिक ,बौद्धिक ,वैचारिक गतिविधियों का केन्द्र बनें वहीं दूसरी ओर वह बनें क्षेत्र के समस्त इतिहास को समेटे एक धरोहर । एक ऐतिहासिक धरोहर ।
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अभियान
..............
"बदलता भारत "का यह शैक्षिक, साहित्यिक और ऐतिहासिक अभियान इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष राज कुमार सचान होरी द्वारा अपने गृह नगर घाटमपुर जनपद कानपुर नगर में अपने साथी कवियों , शायरों, बुद्धिजीवी मित्रों और क्षेत्रीय नागरिकों के साथ 26 जनवरी 2014. से आरम्भ किया गया है ।
घाटमपुर क्षेत्र के गाँव टिकवांपुर में जन्मे महाकवि भूषण ने क्षत्रपति शिवा जी और महाराजा क्षत्रशाल पर वीर रस में कवितायें कीं और वह राष्ट्र कवि के रूप में जाने गये । देश में ,महाकवि भूषण नें घाटमपुर का नाम रोशन किया था ।
नगर पालिका द्वारा अपेक्षित कार्यवाही न किये जाने के कारण बदलता भारत संगठन द्वारा घाटमपुर तहसील के प्रांगण में 28 मई 14 को एक दिवसीय धरने का आयोजन किया गया जिसमें दूर दूर के जनपदों से प्रसिद्ध कवि ,शायर आकर धरने पर दिन भर बैठे । जिसमें बीच बीच में काव्य पाठ और भाषण चलते रहे ।
धरने की नोटिस और घोषणा का इतना व्यापक प्रभाव पड़ा कि प्रस्तावित धरने के दो दिन पूर्व ही नगर पालिका द्वारा बोर्ड की बैठक 26 मई 14 में राज कुमार सचान "होरी"द्वारा प्रस्तुत माँग को मानते हुये "महाकवि भूषण पुस्तकालय,वाचनालय ,सभागार "के निर्माण का प्रस्ताव पारित कर दिया गया और 27 मई को इस आशय का समाचार भी प्रकािशत हुआ ।
साहित्यकारों का प्रभाव समाज और देश ने महसूस किया । 28 मई का पूर्व प्रस्तावित धरना तो किया गया परन्तु नगरपालिका को धन्यवाद देते हुये और यह चेतावनी देते हुये कि समयबद्ध ढंग से कार्य पूर्ण कराया जाय , धरना सायं 5 बजे समाप्त किया गया ।कन्नौज ,रायबरेली , मैनपुरी से आये कवियों , शायरों ने अपने जनपदों में इसी तरह की माँग के लिये अपने यहाँ पर धरने आयोजितकरने के प्रस्ताव रखे ,जिनको पारित किया गया ।
सम्पूर्ण देश में इस तरह का अभियान " बदलता भारत " द्वारा चलाये जाने का निर्णय लिया गया ।
राज कुमार सचान "होरी"
वरिष्ठ साहित्यकार
राष्ट्रीय अध्यक्ष - बदलता भारत
email indiachanges2012@gmail.com, horibadaltabharat.blogspot.com , rajkumarsachanhori@ Facebook.com , horionline.blogspot.com
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{साईं होरी ट्रस्ट (रजि.)द्वारा संचालित }
63, नीति खण्ड ।।। इंदिरापुरम ,ग़ाज़ियाबाद
प्रदेश कार्यालय (उ . प्र .) 11 बसन्त विहार ,मानस सिटी रोड ,इंदिरानगर ,लखनऊ ।
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पुस्तकालय , वाचनालय ,सभागार योजना
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भूमिका
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हमारा देश प्राचीनतम संस्कृति का देश है । विश्व में सर्वाधिक बोली,भाषायें संस्कृतियाँ इसी देश भारत में मिलती हैं । विकास की यात्रा में यह परम आवश्यक है कि हम अपनी पहचान , अपना इतिहास सुरक्षित रखें । किसी ने ठीक ही कहा है --------
'यूनान मिश्र रोमां सब मिट गये जहाँ से ,
कुछ हस्ती है हमारी , मिटती नहीं जहाँ से ।'
प्राचीन भारत में भी नालंदा ,तक्षशिला जैसे शिक्षा केन्द्र अपने विश्व प्रसिद्ध पुस्तकालयों के लिये जाने जाते थे जहाँ विदेशी भारी संख्या में विद्याध्ययन के लिये आते थे । हमारा देश विश्व गुरू था ।दुनियाँ में सर्वाधिक पुस्तकें हम प्रकाशित करते थे ,परन्तु कालान्तर में विदेशी आक्रमणों से स्थितियां निरन्तर खराब होती गईं और आज हम पिछड़ गये ।
आइये हम संस्कृति और इतिहास के संरक्षण के लिये देश में प्रभावी अभियान चलायें ।" बदलता भारत " ने आरम्भ की है -----
" पुस्तकालय , वाचनालय ,सभागार योजना"
इस योजना से देश की संस्कृति ,इतिहास के संरक्षण के साथ साथ शिक्षा और ज्ञान के प्रसार तथा विकास और रोजगार में आशातीत लाभ होगा ।
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योजना क्या है ?
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देश के प्रत्येक जनपद में कम से कम एक नगरपालिका ,नगरनिगम में उस जनपद के सबसे बड़े साहित्यकार या स्वतंत्रता सेनानी के नाम से एक "पुस्तकालय ,वाचनालय,सभागार "का निर्माण स्थानीय निकाय स्वयं अपने संसाधनों , प्रदेश और केन्द्र से प्राप्त धनराशियों तथा सांसद और विधायक निधियों से पूर्ण कराये जिसमें तीन कक्ष हों ---( 1) पुस्तकालय (2) वाचनालय (3) सभागार ।
पुस्तकालय में साहित्य ,विज्ञान ,अर्थशास्त्र , इतिहास, समाजशास्त्र ,धर्म ,दर्शन ,राजनीतिशास्त्र ,भूगोल आदि आदि के साथ इंजीनियरिंग तथा तकनीकी विषयों और मेडिकल व कम्पटीशन की पुस्तकें , पत्र ,पत्रिकायें भी उपलब्ध रहें जिससे क्षेत्रीय विद्यार्थीगण लाभ उठा सकें ।कोचिंग के स्थान पर प्रतिभावान विद्यार्थी स्वयं अध्ययन करते हैं बसर्ते उन्हें पुस्तकें उपलब्ध हों ।
पुस्तकालय के साथ एक कक्ष वाचनालय हो जिसमें बैठ कर विद्यार्थीगण और नागरिक पुस्तकें और पत्र,पत्रिकायें पढ़ सकें । इन्हीं दो कक्षों के साथ एक बड़ा सभागार होना चाहिये जिसका बहुद्देशीय प्रयोग किया जा सके । सभागार नगर की सांस्कृतिक गतिविधियों का केन्द्र बन सके इस लिये यह कम से कम 100 फ़ीट लम्बा और 60 फ़ीट चौड़ा हो । इस सभागार में क्षेत्र के स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों ,साहित्यकारों तथा अन्य प्रसिद्ध व्यक्तियों के चित्र संक्षिप्त विवरण के साथ लगाये जांय ।
"पुस्तकालय,वाचनालय ,सभागार " जहाँ एक ओर समस्त सांस्कृतिक , साहित्यिक ,बौद्धिक ,वैचारिक गतिविधियों का केन्द्र बनें वहीं दूसरी ओर वह बनें क्षेत्र के समस्त इतिहास को समेटे एक धरोहर । एक ऐतिहासिक धरोहर ।
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अभियान
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"बदलता भारत "का यह शैक्षिक, साहित्यिक और ऐतिहासिक अभियान इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष राज कुमार सचान होरी द्वारा अपने गृह नगर घाटमपुर जनपद कानपुर नगर में अपने साथी कवियों , शायरों, बुद्धिजीवी मित्रों और क्षेत्रीय नागरिकों के साथ 26 जनवरी 2014. से आरम्भ किया गया है ।
घाटमपुर क्षेत्र के गाँव टिकवांपुर में जन्मे महाकवि भूषण ने क्षत्रपति शिवा जी और महाराजा क्षत्रशाल पर वीर रस में कवितायें कीं और वह राष्ट्र कवि के रूप में जाने गये । देश में ,महाकवि भूषण नें घाटमपुर का नाम रोशन किया था ।
नगर पालिका द्वारा अपेक्षित कार्यवाही न किये जाने के कारण बदलता भारत संगठन द्वारा घाटमपुर तहसील के प्रांगण में 28 मई 14 को एक दिवसीय धरने का आयोजन किया गया जिसमें दूर दूर के जनपदों से प्रसिद्ध कवि ,शायर आकर धरने पर दिन भर बैठे । जिसमें बीच बीच में काव्य पाठ और भाषण चलते रहे ।
धरने की नोटिस और घोषणा का इतना व्यापक प्रभाव पड़ा कि प्रस्तावित धरने के दो दिन पूर्व ही नगर पालिका द्वारा बोर्ड की बैठक 26 मई 14 में राज कुमार सचान "होरी"द्वारा प्रस्तुत माँग को मानते हुये "महाकवि भूषण पुस्तकालय,वाचनालय ,सभागार "के निर्माण का प्रस्ताव पारित कर दिया गया और 27 मई को इस आशय का समाचार भी प्रकािशत हुआ ।
साहित्यकारों का प्रभाव समाज और देश ने महसूस किया । 28 मई का पूर्व प्रस्तावित धरना तो किया गया परन्तु नगरपालिका को धन्यवाद देते हुये और यह चेतावनी देते हुये कि समयबद्ध ढंग से कार्य पूर्ण कराया जाय , धरना सायं 5 बजे समाप्त किया गया ।कन्नौज ,रायबरेली , मैनपुरी से आये कवियों , शायरों ने अपने जनपदों में इसी तरह की माँग के लिये अपने यहाँ पर धरने आयोजितकरने के प्रस्ताव रखे ,जिनको पारित किया गया ।
सम्पूर्ण देश में इस तरह का अभियान " बदलता भारत " द्वारा चलाये जाने का निर्णय लिया गया ।
राज कुमार सचान "होरी"
वरिष्ठ साहित्यकार
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Saturday, May 31, 2014
बौद्धिक प्रकोष्ठ
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बौद्धिक प्रकोष्ठ
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भूमिका
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देश में बहुसंख्यक वर्ग कैसे पिछड़ा वर्ग और दलित की श्रेणी में आ गया ?? क्या उत्तर है ? या हम पूछें कि देश की इतनी भारी जनसंख्या लगभग 80% से 90% तक दौड़ में पिछड़ कैसे गयी और स्वतन्त्रता के इतने वर्षों बाद भी पिछड़ी और दलित है ??!! इनके अनेक उत्तर आप देते चले आये हैं और देते रहेंगे । समग्र उत्तरों में 99% केवल इसके लिये अगड़ों को उत्तरदायी मानने के होंगे और पिछड़ोंतथा दलितों द्वारा पानी पी पी कर अगड़ों को कोसने से सम्बन्धित होंगे । मैं नहीं कहता कि दोषी और उत्तरदायी लोगों को बेनकाब न किया जाय । करिये अवश्य करिये । ग़लत नीतियों का विरोध हमेशा होना ही चाहिये । समानता की माँग आवश्यक है ।
आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में दो वर्ग सदा से रहे हैं ----एक --शोषक वर्ग और द्वितीय --शोषित वर्ग । प्रकृति का दस्तूर है कि शोषक सदा अपनी सत्ता को बढ़ता है और शोषित लगातार उसका विरोध करता है और ताजीवन छटपटाता है । इसके लिये शोषित हमेशा एक होने की बात करता है ,एकता के कार्यक्रम और आन्दोलन चलाता है । पर गंभीर चिन्तन की आवश्यकता है कि क्यों लगातार शोषित वर्गों को वह सफलता नहीं मिलती जिसकी उसे अपेक्षा रही है ? क्यों आज भी इन वर्गों की उन्नति के आँकड़े भयावह हैं ?? फिर हम ऊपर वालों को दोष देने बैठ जायेंगे और यही हम सदियों से करते आये हैं । कभी हम एकलव्य , कभी शम्बूक की कथायें सुनायेंगे । कभी सरदार पटेल जैसे अनेक नाम लेंगे जो अन्याय का शिकार हुये । हम मानते हैं यह सब सही है । इस देश में जातिप्रथा इतनी जबरदस्त है कि हर जाति अपने लिये जीती है और अपनों का समर्थन करती है । यह सत्य नहीं है कि ऐसा सिर्फ़ अगड़ी जातियाँ करती हैं बल्कि पिछड़े और दलित भी अवसर मिलने पर यही करते हैं ।
पिछड़ों और दलितों के इतने संगठन हैं कि आप गिन नहीं पायेंगे । आखिर उनको समुचित परिणाम क्यों नहीं मिलता ?? आइये इसको समझने के लिये हम एक उदाहरण लें ----एक व्यक्ति है उसे टीबी (तपेदिक) है । पहले तो बीमारी का निदान आवश्यक है diagnosis होना चाहिये । इन समाजों में अनेक डा. ऐसे हैं जिन्हें बीमारी का पता ही नहीं और तुर्रा यह कि वे समाज के बहुत बड़े डाक्टर हैं । बीमारी कुछ और इलाज कुछ । बीमारी ठीक कैसे होगी ? दूसरी संख्या उन लोंगो की है जो बीमारी तो जान गये हैं पर बजाय समुचित इलाज करने के बीमारी के लिये दूसरों को दोष देते हैं, बतायेंगे किन किन के कारण बीमारी हुई ? दूसरों का कितना दोष है ? बैक्टीरिया का कितना दोष है ? किस्सा यह कि उनका समय इन्हीं विरोधों और चिन्ताओं में चला जाता है --बीमार और बीमार होता जाता है । मरीज़ को समय से जो दवाइयाँ मिलनी चाहिये वे नहीं मिल पातीं और वह लगातार मरणासन्न होता जाता है ।
मेरा मानना है कि मरीज़ का समुचित इलाज होना चाहिये जो कारगर भी हो । टीबी की समयबद्ध दवायें चलें और मरीज़ का पोषण किया जाय , उसे पौष्टिक भोजन दिया जाय तो निश्चित ही वह एक दिन चंगा हो जायेगा ।आइये हम मर्ज को पहले पहचानें फिर उसका इलाज करंे । टीबी है तो टीबी का इलाज , कैंसर है तो कैंसर का इलाज ।
आयें , विचारें हम पहले अपने को बीमार मानें । बीमारों को एकत्रित कर कभी सफलता नहीं मिलेगी चाहे आप बहुसंख्यक हों , हैं तो आप बीमार ही और वह भी सदियों से ।आप की बीमारी वास्तव में है क्या ?? सत्ता की भागीदारी के लिये पहले तो हृष्ट पुष्ट बनना पड़ेगा । आप से ही पूछता हूं -कमज़ोरों की सेना बनायी जाय भले ही वह भारी संख्या में हो फिर भी वह पराजित हो जायेगी और लगातार पराजित होती रहेगी । जैसा कि हम देखते रहे हैं ।हम पिछडे़ हैं यह बीमारी है , दलित हैं हैं - यह बीमारी है । यहाँ मैं एक बात और स्पष्ट कर दूं कि आर्थिक पिछड़ेपन से अधिक बौद्धिक , मानसिक पिछड़ापन है । आरक्षण का उपाय संविधान में किया गया पर उससे आंशिक सफलता ही मिली । शैक्षिक और बौद्धिक पिछड़ेपन के कारण आज भी पद खाली के खाली रह जाते हैं । हम कुछ हद तक शिक्षित होते हैं पर बौद्धिक नहीं होते , कुछ अपवाद छोड़ कर ।
मैं फिर कुछ प्रश्न करता हूं --इन वर्गों में कितने लेखक हैं ? कितने पत्रकार हैं? कितने कवि हैं? कितने कहानीकार ? कितने उपन्यासकार? कितने कलाकार ? कितने गायक? कितने धर्माचार्य ? या मैं दूसरी तरह से पूछूं कितने चाणक्य ? कितने वशिष्ठ ? कितने बुद्ध ? कितने दयानन्द ? कितने विवेकानन्द? या पूछूं मन्दिरों में आपके कितने पुजारी हैं? कितने शादी विवाह और अन्य धार्मिक कार्य कराने वाले?
क्या आपके परिवारों , आपके संगठनों ने इन क्षेत्रों में भागीदारी के कार्यक्रम चलाये ? चलाये तो कितने पत्रकार, लेखक , कवि आदि आदि पैदा किये? आप कहेंगे ये पैदा नहीं किये जाते , ये जन्मजात होते हैं । मान भी लें तो क्या आपने और आपके संगठनों ने वातावरण दिया कि जिससे इन क्षेत्रों में प्रतिभा निखरती ? होता यह आया है कि इन क्षेत्रों में आपके बीच कोई काम करता है तो उसे कभी सम्मान नहीं देंगे बढ़ावा देना तो दूर । आप बाल्मीकि का उत्तराधिकारी नहीं पैदा कर पाये । अम्बेडकर ने कहा शिक्षित बनो --हमने उनकी मूर्तियाँ लगा दीं और मस्त हो गये अपने में । पहले भी हम यह कर चुके हैं --बुद्ध की शिक्षा मानने के बजाय बना दी उनकी भी मूर्तियाँ जो मूर्ति पूजा के ही विरोधी थे ।
हम क्या करें?? व्यक्ति के रूप में आप अपने परिवार , सगे सम्बन्धियों में चिन्हित करें जिन्हें थोड़ी भी रुचि हो इन क्षेत्रों में । संगठनों के रूप में अपने अपने समाजों में चिन्हित करें उन लोगों को जो या तो रुचि रखते हों या कुछ काम कर रहे हों , फिर उन्हें बढ़ावा दें और उनको आर्थिक सहायता दें ताकि उनके कृतित्व का प्रकाशन हो सके ।
एक परिकल्पना दूँगा --आप की आबादी मान लें 100 करोड़ है तो अगर एक प्रतिशत यानी एक करोड़ लेखक , कवि हो जायें और वे एक साल में एक किताब भी अपने मनचाहे विषय पर लिखें तो हर वर्ष एक करोड़ किताबें !! और निश्चित वे आपके साथ न्याय करेंगी । पाँच वर्षों में पाँच करोड़ पुस्तकें तो देश में बौद्धिक क्रांति ले आयेंगी । इन में से कुछ लाख पत्रकार हों तो सम्भव है आपके साथ कोई अन्याय कर सके । कुछ लाख धर्माचार्य हों, कलाकार हों तो कौन सी क्रांति हो जायेगी कभी सोचा है ?
विश्व गवाह है ----बौद्धिक क्रान्तियों के बाद ही राजनैतिक क्रांतियां होती हैं । अगर ऐसा हुआ तो राजनैतिक भागीदारी को कौन रोक पायेगा ? फिर सत्ता तो आपके पास ही रहेगी बौद्धिक भी और राजनैतिक भी । लेकिन फिर स्मरण करा दूं बौद्धिक सत्ता चाभी है राजनैतिक सत्ता पाने के लिये । दूर क्यों जायें दक्षिण भारत में यह बहुत पहले हो चुका है -- रामास्वामी नायकरों और ज्योति फुलों द्वारा । अम्बेडकर भी बाद में राजनैतिक थे पहले थे लेखक , विचारक 14 पुस्तकों के लेखक । तभी उनका लोहा गांधी , पटेल ,नेहरू सब मानते थे । वे इन्हीं गुणों और विशेषताओं के कारण संविधान की ड्राफ्ट कमेटी के अध्यक्ष बनाये गये । उनकी योग्यता को राष्ट्र ने नमन किया । आइये हम कुछ कार्यक्रम चलायें और एक क्रांति के संवाहक बनें ।
मुख्य कार्यक्रम --------
१--संगठनों में विभिन्न बौद्धिक और कला के क्षेत्रों में कार्य करने वालों या रुचि रखने वालों को चिन्हित करें ।प्रथक प्रथक नाम पतों के साथ अभिलेख बनायें ।
२-- सम्मेलनों और कार्यक्रमों में उन्हें सम्मानित करें ।
३-- उनकी कला के विकास के लिये और उनकी रचित पुस्तकों के प्रकाशन के लिये उन्हे आर्थिक सहयोग दें --समाज के धनी व्यक्ति आगे आयें ।
४-- लगातार --साप्ताहिक , मासिक समीक्षा करें कि इन क्षेत्रों में कितनी प्रगति हुई ।
५-- पत्र पत्रिकाओं की संख्या बढ़ायें और उन्हे लेखकीय , आर्थिक सहयोग दें ।
६-- रचनाकारों को पुस्तकें लिखने के लक्ष्य दें और उनके प्रकाशन की व्यवस्था करायें ।
७--रचनाकारों के प्रथक से भी संगठन बनायें और उनके सम्मेलन करें ।
राज कुमार सचान "होरी"- अध्यक्ष - बौद्धिक प्रकोष्ठ
राष्ट्रीय अध्यक्ष -बदलता भारत
www.badaltabharat.com , horibadaltabharat.blogspot.com , Facebook.com/Rajkumarsachanhori
Email rajkumarsachanhori@gmail.com , horirajkumarsachan@gmail.com
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भूमिका
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देश में बहुसंख्यक वर्ग कैसे पिछड़ा वर्ग और दलित की श्रेणी में आ गया ?? क्या उत्तर है ? या हम पूछें कि देश की इतनी भारी जनसंख्या लगभग 80% से 90% तक दौड़ में पिछड़ कैसे गयी और स्वतन्त्रता के इतने वर्षों बाद भी पिछड़ी और दलित है ??!! इनके अनेक उत्तर आप देते चले आये हैं और देते रहेंगे । समग्र उत्तरों में 99% केवल इसके लिये अगड़ों को उत्तरदायी मानने के होंगे और पिछड़ोंतथा दलितों द्वारा पानी पी पी कर अगड़ों को कोसने से सम्बन्धित होंगे । मैं नहीं कहता कि दोषी और उत्तरदायी लोगों को बेनकाब न किया जाय । करिये अवश्य करिये । ग़लत नीतियों का विरोध हमेशा होना ही चाहिये । समानता की माँग आवश्यक है ।
आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में दो वर्ग सदा से रहे हैं ----एक --शोषक वर्ग और द्वितीय --शोषित वर्ग । प्रकृति का दस्तूर है कि शोषक सदा अपनी सत्ता को बढ़ता है और शोषित लगातार उसका विरोध करता है और ताजीवन छटपटाता है । इसके लिये शोषित हमेशा एक होने की बात करता है ,एकता के कार्यक्रम और आन्दोलन चलाता है । पर गंभीर चिन्तन की आवश्यकता है कि क्यों लगातार शोषित वर्गों को वह सफलता नहीं मिलती जिसकी उसे अपेक्षा रही है ? क्यों आज भी इन वर्गों की उन्नति के आँकड़े भयावह हैं ?? फिर हम ऊपर वालों को दोष देने बैठ जायेंगे और यही हम सदियों से करते आये हैं । कभी हम एकलव्य , कभी शम्बूक की कथायें सुनायेंगे । कभी सरदार पटेल जैसे अनेक नाम लेंगे जो अन्याय का शिकार हुये । हम मानते हैं यह सब सही है । इस देश में जातिप्रथा इतनी जबरदस्त है कि हर जाति अपने लिये जीती है और अपनों का समर्थन करती है । यह सत्य नहीं है कि ऐसा सिर्फ़ अगड़ी जातियाँ करती हैं बल्कि पिछड़े और दलित भी अवसर मिलने पर यही करते हैं ।
पिछड़ों और दलितों के इतने संगठन हैं कि आप गिन नहीं पायेंगे । आखिर उनको समुचित परिणाम क्यों नहीं मिलता ?? आइये इसको समझने के लिये हम एक उदाहरण लें ----एक व्यक्ति है उसे टीबी (तपेदिक) है । पहले तो बीमारी का निदान आवश्यक है diagnosis होना चाहिये । इन समाजों में अनेक डा. ऐसे हैं जिन्हें बीमारी का पता ही नहीं और तुर्रा यह कि वे समाज के बहुत बड़े डाक्टर हैं । बीमारी कुछ और इलाज कुछ । बीमारी ठीक कैसे होगी ? दूसरी संख्या उन लोंगो की है जो बीमारी तो जान गये हैं पर बजाय समुचित इलाज करने के बीमारी के लिये दूसरों को दोष देते हैं, बतायेंगे किन किन के कारण बीमारी हुई ? दूसरों का कितना दोष है ? बैक्टीरिया का कितना दोष है ? किस्सा यह कि उनका समय इन्हीं विरोधों और चिन्ताओं में चला जाता है --बीमार और बीमार होता जाता है । मरीज़ को समय से जो दवाइयाँ मिलनी चाहिये वे नहीं मिल पातीं और वह लगातार मरणासन्न होता जाता है ।
मेरा मानना है कि मरीज़ का समुचित इलाज होना चाहिये जो कारगर भी हो । टीबी की समयबद्ध दवायें चलें और मरीज़ का पोषण किया जाय , उसे पौष्टिक भोजन दिया जाय तो निश्चित ही वह एक दिन चंगा हो जायेगा ।आइये हम मर्ज को पहले पहचानें फिर उसका इलाज करंे । टीबी है तो टीबी का इलाज , कैंसर है तो कैंसर का इलाज ।
आयें , विचारें हम पहले अपने को बीमार मानें । बीमारों को एकत्रित कर कभी सफलता नहीं मिलेगी चाहे आप बहुसंख्यक हों , हैं तो आप बीमार ही और वह भी सदियों से ।आप की बीमारी वास्तव में है क्या ?? सत्ता की भागीदारी के लिये पहले तो हृष्ट पुष्ट बनना पड़ेगा । आप से ही पूछता हूं -कमज़ोरों की सेना बनायी जाय भले ही वह भारी संख्या में हो फिर भी वह पराजित हो जायेगी और लगातार पराजित होती रहेगी । जैसा कि हम देखते रहे हैं ।हम पिछडे़ हैं यह बीमारी है , दलित हैं हैं - यह बीमारी है । यहाँ मैं एक बात और स्पष्ट कर दूं कि आर्थिक पिछड़ेपन से अधिक बौद्धिक , मानसिक पिछड़ापन है । आरक्षण का उपाय संविधान में किया गया पर उससे आंशिक सफलता ही मिली । शैक्षिक और बौद्धिक पिछड़ेपन के कारण आज भी पद खाली के खाली रह जाते हैं । हम कुछ हद तक शिक्षित होते हैं पर बौद्धिक नहीं होते , कुछ अपवाद छोड़ कर ।
मैं फिर कुछ प्रश्न करता हूं --इन वर्गों में कितने लेखक हैं ? कितने पत्रकार हैं? कितने कवि हैं? कितने कहानीकार ? कितने उपन्यासकार? कितने कलाकार ? कितने गायक? कितने धर्माचार्य ? या मैं दूसरी तरह से पूछूं कितने चाणक्य ? कितने वशिष्ठ ? कितने बुद्ध ? कितने दयानन्द ? कितने विवेकानन्द? या पूछूं मन्दिरों में आपके कितने पुजारी हैं? कितने शादी विवाह और अन्य धार्मिक कार्य कराने वाले?
क्या आपके परिवारों , आपके संगठनों ने इन क्षेत्रों में भागीदारी के कार्यक्रम चलाये ? चलाये तो कितने पत्रकार, लेखक , कवि आदि आदि पैदा किये? आप कहेंगे ये पैदा नहीं किये जाते , ये जन्मजात होते हैं । मान भी लें तो क्या आपने और आपके संगठनों ने वातावरण दिया कि जिससे इन क्षेत्रों में प्रतिभा निखरती ? होता यह आया है कि इन क्षेत्रों में आपके बीच कोई काम करता है तो उसे कभी सम्मान नहीं देंगे बढ़ावा देना तो दूर । आप बाल्मीकि का उत्तराधिकारी नहीं पैदा कर पाये । अम्बेडकर ने कहा शिक्षित बनो --हमने उनकी मूर्तियाँ लगा दीं और मस्त हो गये अपने में । पहले भी हम यह कर चुके हैं --बुद्ध की शिक्षा मानने के बजाय बना दी उनकी भी मूर्तियाँ जो मूर्ति पूजा के ही विरोधी थे ।
हम क्या करें?? व्यक्ति के रूप में आप अपने परिवार , सगे सम्बन्धियों में चिन्हित करें जिन्हें थोड़ी भी रुचि हो इन क्षेत्रों में । संगठनों के रूप में अपने अपने समाजों में चिन्हित करें उन लोगों को जो या तो रुचि रखते हों या कुछ काम कर रहे हों , फिर उन्हें बढ़ावा दें और उनको आर्थिक सहायता दें ताकि उनके कृतित्व का प्रकाशन हो सके ।
एक परिकल्पना दूँगा --आप की आबादी मान लें 100 करोड़ है तो अगर एक प्रतिशत यानी एक करोड़ लेखक , कवि हो जायें और वे एक साल में एक किताब भी अपने मनचाहे विषय पर लिखें तो हर वर्ष एक करोड़ किताबें !! और निश्चित वे आपके साथ न्याय करेंगी । पाँच वर्षों में पाँच करोड़ पुस्तकें तो देश में बौद्धिक क्रांति ले आयेंगी । इन में से कुछ लाख पत्रकार हों तो सम्भव है आपके साथ कोई अन्याय कर सके । कुछ लाख धर्माचार्य हों, कलाकार हों तो कौन सी क्रांति हो जायेगी कभी सोचा है ?
विश्व गवाह है ----बौद्धिक क्रान्तियों के बाद ही राजनैतिक क्रांतियां होती हैं । अगर ऐसा हुआ तो राजनैतिक भागीदारी को कौन रोक पायेगा ? फिर सत्ता तो आपके पास ही रहेगी बौद्धिक भी और राजनैतिक भी । लेकिन फिर स्मरण करा दूं बौद्धिक सत्ता चाभी है राजनैतिक सत्ता पाने के लिये । दूर क्यों जायें दक्षिण भारत में यह बहुत पहले हो चुका है -- रामास्वामी नायकरों और ज्योति फुलों द्वारा । अम्बेडकर भी बाद में राजनैतिक थे पहले थे लेखक , विचारक 14 पुस्तकों के लेखक । तभी उनका लोहा गांधी , पटेल ,नेहरू सब मानते थे । वे इन्हीं गुणों और विशेषताओं के कारण संविधान की ड्राफ्ट कमेटी के अध्यक्ष बनाये गये । उनकी योग्यता को राष्ट्र ने नमन किया । आइये हम कुछ कार्यक्रम चलायें और एक क्रांति के संवाहक बनें ।
मुख्य कार्यक्रम --------
१--संगठनों में विभिन्न बौद्धिक और कला के क्षेत्रों में कार्य करने वालों या रुचि रखने वालों को चिन्हित करें ।प्रथक प्रथक नाम पतों के साथ अभिलेख बनायें ।
२-- सम्मेलनों और कार्यक्रमों में उन्हें सम्मानित करें ।
३-- उनकी कला के विकास के लिये और उनकी रचित पुस्तकों के प्रकाशन के लिये उन्हे आर्थिक सहयोग दें --समाज के धनी व्यक्ति आगे आयें ।
४-- लगातार --साप्ताहिक , मासिक समीक्षा करें कि इन क्षेत्रों में कितनी प्रगति हुई ।
५-- पत्र पत्रिकाओं की संख्या बढ़ायें और उन्हे लेखकीय , आर्थिक सहयोग दें ।
६-- रचनाकारों को पुस्तकें लिखने के लक्ष्य दें और उनके प्रकाशन की व्यवस्था करायें ।
७--रचनाकारों के प्रथक से भी संगठन बनायें और उनके सम्मेलन करें ।
राज कुमार सचान "होरी"- अध्यक्ष - बौद्धिक प्रकोष्ठ
राष्ट्रीय अध्यक्ष -बदलता भारत
www.badaltabharat.com , horibadaltabharat.blogspot.com , Facebook.com/Rajkumarsachanhori
Email rajkumarsachanhori@gmail.com , horirajkumarsachan@gmail.com
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Friday, May 30, 2014
Fwd: Raj Kumar Sachan Hori BJP leader and Rashtriya Adhyaksha BADALTA BHARAT with Anupriya Patel MP Mirzapur and General Secretary Apnadal .
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---------- Forwarded message ----------
From: Raj Kumar Sachan HORI <rajkumarsachanhori@gmail.com>
Date: Wednesday, May 28, 2014
Subject: PH
To: Rajkumar sachan <horirajkumar@gmail.com>
Saturday, May 17, 2014
Friday, May 16, 2014
TO CHECK FARMERS' SUCIDES
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किसानों में आत्म हत्या का मूल कारण है उसकी खेती में लागत अधिक और बिक्री मूल्य कम । इससे शुद्ध आय कम या बिलकुल न होने के कारण वह आत्महत्या करता है ।वास्तविक लागत जोड़ कर फिर उस पर ५०% लाभ किसानों को देने की घोषणा नरेन्द्र मोदी जी ने चुनावी रैली में की थी ।
हम बदलता भारत की ओर से इस शासनादेश की शीघ्र माँग करते हैं ।
राज कुमार सचान होरी
राष्ट्रीय अध्यक्ष --बदलता भारत
हम बदलता भारत की ओर से इस शासनादेश की शीघ्र माँग करते हैं ।
राज कुमार सचान होरी
राष्ट्रीय अध्यक्ष --बदलता भारत
Monday, May 12, 2014
Tuesday, April 29, 2014
दोहे मोदी के
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दोहे मोदी के
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1--मोदी जैसा चाहिये , कुशल प्रशासक आज ।
जो पटेल सा बन करे , राष्ट्र जनों का काज ।।
2--लौह शक्ति सा हो अटल ,हो पटेल का दूत ।
मोदी भारत भूमि का , सच्चा , सुदृढ़ सपूत ।।
3--आज राष्ट्र को चाहिये , एक कुशल सरदार ।
जो सरदार पटेल का , निभा सके किरदार ।।
4--मोदी और पटेल की , बी जे पी की राह ।
कुशल प्रशासक चाहिये, आज देश की चाह ।।
5--सशक्त राष्ट्र के वास्ते , लौह पुरुष की राह ।
मोदी जी अब सज रहे , अजी वाह भइ वाह ।।
राज कुमार सचान "होरी"
वरिष्ठ साहित्यकार, भाजपा नेता,पूर्व प्रशासनिक अधिकारी
राष्ट्रीय अध्यक्ष --"बदलता भारत ", एवं राष्ट्रीय संयोजक -पटेल इंडिया मिशन ,संपादक -पटेल टाइम्स ़ ़email -rajkumarsachanhori@gmail.com
9958788699 , 07599155999
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1--मोदी जैसा चाहिये , कुशल प्रशासक आज ।
जो पटेल सा बन करे , राष्ट्र जनों का काज ।।
2--लौह शक्ति सा हो अटल ,हो पटेल का दूत ।
मोदी भारत भूमि का , सच्चा , सुदृढ़ सपूत ।।
3--आज राष्ट्र को चाहिये , एक कुशल सरदार ।
जो सरदार पटेल का , निभा सके किरदार ।।
4--मोदी और पटेल की , बी जे पी की राह ।
कुशल प्रशासक चाहिये, आज देश की चाह ।।
5--सशक्त राष्ट्र के वास्ते , लौह पुरुष की राह ।
मोदी जी अब सज रहे , अजी वाह भइ वाह ।।
राज कुमार सचान "होरी"
वरिष्ठ साहित्यकार, भाजपा नेता,पूर्व प्रशासनिक अधिकारी
राष्ट्रीय अध्यक्ष --"बदलता भारत ", एवं राष्ट्रीय संयोजक -पटेल इंडिया मिशन ,संपादक -पटेल टाइम्स ़ ़email -rajkumarsachanhori@gmail.com
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Tuesday, April 15, 2014
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RajKumarSachanHori (@Sachanhori) tweeted at 12:07pm - 16 Apr 14:
आसमान में खींचिये, इतनी भव्य लकीर ।
बस तुझसे ही पूछ कर ,खुदा लिखे तक़दीर।।
---राजकुमार सचान "होरी" (https://twitter.com/Sachanhori/status/456320446745432064)
Get the official Twitter app at https://twitter.com/download
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आसमान में खींचिये, इतनी भव्य लकीर ।
बस तुझसे ही पूछ कर ,खुदा लिखे तक़दीर।।
---राजकुमार सचान "होरी" (https://twitter.com/Sachanhori/status/456320446745432064)
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Sunday, April 13, 2014
Sunday, April 06, 2014
Saturday, April 05, 2014
Friday, April 04, 2014
Thursday, April 03, 2014
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