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Wednesday, July 27, 2011

face book ke face(part2) hori khada bazaar men

                  {व्यंग्य}              फेस बुक के फेस(भाग २) ....[होरी खड़ा बाज़ार में ]
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आदरणीय  मिश्र  जी को फेस लटकाए सब्जी मण्डी में छोड़ 'होरी' आगे बढ़ गया |तभी जैसे ही आगे बढ़ा , और बाज़ार में लेडिस /जेंट्स ब्यूटी पार्लर ,बाडी बिल्डिंग की मार्केट आरंभ हुयी , एक जेंट्स पार्लर में मसाज कराते और एक सामने के लेडिस ब्यूटी पार्लर में किसी को रस भरी आँखों से घूरते  , ताकते , एक चिर युवा , मर्दानगी से भरपूर  परम श्रधेय श्री हरिपाल सिंह जी दिखाई दिए | यही कोई ८६ वर्ष के | पूरे जवान | तन ,मन, दिल ,दिमाग से पूरे मेंटेन |  
                               मैंने सोचा बात करलूं | पहले तो पहचान  ही नहीं आये , बालों में खिजाब , दाढ़ी में खिजाब  के साथ साथ  मूंछें साफ़ | भौहों , बरौनियों में भी खिजाब | मैं भी यह मनोहारी रूप देख मंद , मंद मुश्काया  फिर पूछ बैठा ...'माज़रा क्या है ? सब खैरियत तो है ? यह श्रंगार रसराज आप पर सवार ??!!आप का  यह हाल  किसने बनाया ?वह कौन खुशनसीब है जिसने वीर रस के कवि को श्रंगार में आकंठ डुबोया ? मैं  भी  तो जानूं |वह चौसंठ  कलाओं में मुश्कराए , सोलहों श्रंगार की भंगिमा बनाते हुए बोले ...'सब फेस बुक का कमाल है , इन्टरनेट  का जादू है |[क्रमशः]
 

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