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Wednesday, July 27, 2011

face book ke face(part2) hori khada bazaar men

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                  {व्यंग्य}              फेस बुक के फेस(भाग २) ....[होरी खड़ा बाज़ार में ]
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आदरणीय  मिश्र  जी को फेस लटकाए सब्जी मण्डी में छोड़ 'होरी' आगे बढ़ गया |तभी जैसे ही आगे बढ़ा , और बाज़ार में लेडिस /जेंट्स ब्यूटी पार्लर ,बाडी बिल्डिंग की मार्केट आरंभ हुयी , एक जेंट्स पार्लर में मसाज कराते और एक सामने के लेडिस ब्यूटी पार्लर में किसी को रस भरी आँखों से घूरते  , ताकते , एक चिर युवा , मर्दानगी से भरपूर  परम श्रधेय श्री हरिपाल सिंह जी दिखाई दिए | यही कोई ८६ वर्ष के | पूरे जवान | तन ,मन, दिल ,दिमाग से पूरे मेंटेन |  
                               मैंने सोचा बात करलूं | पहले तो पहचान  ही नहीं आये , बालों में खिजाब , दाढ़ी में खिजाब  के साथ साथ  मूंछें साफ़ | भौहों , बरौनियों में भी खिजाब | मैं भी यह मनोहारी रूप देख मंद , मंद मुश्काया  फिर पूछ बैठा ...'माज़रा क्या है ? सब खैरियत तो है ? यह श्रंगार रसराज आप पर सवार ??!!आप का  यह हाल  किसने बनाया ?वह कौन खुशनसीब है जिसने वीर रस के कवि को श्रंगार में आकंठ डुबोया ? मैं  भी  तो जानूं |वह चौसंठ  कलाओं में मुश्कराए , सोलहों श्रंगार की भंगिमा बनाते हुए बोले ...'सब फेस बुक का कमाल है , इन्टरनेट  का जादू है |[क्रमशः]
 

KURMI KSHATRIYA MAHAA SANGH : FACE BOOK KE FACE( part 2)[HORI KHADA BAZAR MEN ]

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Monday, July 25, 2011

FACEBOOK KE FACE[HORI KHADAA BAZAAR MEN]

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                                                                                                       फेस बुक के फेस [ होरी खड़ा बज़ार   में ]
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'होरी' को  बहुत  दिनों  बाद  आज  बाज़ार  में  टहलते  हुए   पत्रकार , कवी , लेखक , समीक्षक , संपादक  , यु एस एम् पत्रिका फेम वाले आदरणीय उमासंकर मिश्र  जी मिल गए |हमेशा सीना तान कर चलने   वाले ,सर   आसमान  की   और  रखने  वाले  भाई  मिश्र  जी  आज  फेस  नीचा   किये   हुए  थे |मैनें  पूछ  लिया  आदरणीय  आज  फेस  नीचा  क्यों ? सुनते ही वह बिफर पड़े , फिर बिखरे , बिखरे  करुण रस में  डूबे हुए , भुन भुनाते हुए बोले .....'होरी' जी मैं फेस बुक के चक्कर में पड़ गया | आज हाल यह है कि ३५ वर्षों  की साहित्यिक  साधना गर्त में मिल गयी  | फेस बुक ने मेरा फेस ही बिगड़ दिया , क्या करूँ , नीचे कर के चल रहा हूँ |
                                                                                 मैंने कहा ...पहेलियाँ  न बुझाईये , माजरा क्या है ? बताईये | वह ठंडी  साँसें लेते हुए मुझसे रौद्र रस में बोले ......'होरी' , यार तुम्ही ने इस जाल में फंसा दिया |मै  सीधा  सादा  , कलम , कागज , दवात  के  बल पर साहित्य सर्जन करता था , साहित्यकार   बना  था ,डाक तार  विभाग  अधिक से अधिक  कोरियर  की  सेवाएँ  ले  लेता  था |तुम्ही ने कहा था की इंटरनेट  का युग है ....इमेल खोलो ... फेस बुक में जाओ | मै चला गया | मै भी फेस बुक वाला बन गया , चैटिंग करने लग गया , मेसेज  भेजने  लग गया  |मेरा नाम इन्टरनेट में छा गया | मै  घोड़े  की  तरह  दौड़  ही  रहा  था  कि   किसी  ने  घोड़े  को     टंगड़ी   मारी , घोड़े    ने मुझे     दुलत्ती  मारी ,मैं चारो खाने चित्त |मिश्र जी फेस जमीं में गडाए ,गडाए   बोले ...भाई मेरे विरोधिओं ने फेस बुक में  मेरे बारे  में  न जाने क्या क्या कहा .... पाखंडी , कविता चोर , कहानी चोर , साहित्य चोर , dhan hadpu  आदि आदि विशेषण तो दिए ही  'मां , 'बहन ' तक कर डाली |मैं जवाब देते देते परेशान | जितना जवाब देता उतनी ही मेरे खिलाफ मुहीम तेज | फेस बुक में मेरे खिलाफ लायिक कि बटन ऐसे दबाई   कि मुझे ही नालायक बना दिया |  
                             सब मेरे विरोधियों को लायिक कर रहे थे |

Friday, July 22, 2011

NANG MAHIMA[PART3] HORI KHADAA BAZAARMEN

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                   नंग महिमा [भाग ३]
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जन्म से ही नंगा होने के कारण जीव जन्मजात नंग है |उसकी कुंडली में 'नंगई' है |तभी वह हमेशा नंगई पर उतरा रहता है |वश्त्र धारण तो वह मा बाप
के दबाव  में ही करता है, अन्यथा उसे तो नग्न रूप ही भाता है | बल बच्चेदार 
हैं तो जानते ही होंगे ,बच्चे को मौका मिला ,तुरंत कपडे उतार फेंके |
                बड़े हो कर बच्चे युवक बनते हैं , लेकिन लुके छिपे वही नग्न रूप 
निहारने में आगे  रहते हैं |मान  मर्यादा में भले वे  वश्त्र धारण  करे ,पर   
अवसर पाते ही दुह्शासन  की तरह  चीर हरण में पीछे नहीं रहते  |जवानी में नंगई में इतना  व्याकुल  रहता  है कि नग्नता को श्रंगार कहता है | साहित्यकारनुमा  नंग एक हाथ  आगे बढ़ कर  श्रंगार को रसराज  का दर्जा 
दे देते हैं | कई नामधारी , अनामधारी  कवि तो अपने साहित्य में नग्न चित्रण के अतिरिक्त  कुछ  नहीं  करते हैं | 
                          चार आश्रम है ... ब्रह्मचर्य , गृहस्थ , वानप्रस्थ  और सन्यास | ब्रह्मचर्य में चोरी छिपे नंगई , गृहस्थ में खुले आम |वानप्रस्थ और सन्यास में सलीके और सभ्यता के आवरण में नग्न रस का पान | सौ साल का बूढ़ा भी कहता है .....दिल तो अभी जवान है |
इसी नंगई की महिमा है कि जन संख्या दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ रही है |
                                            हमारे अन्दर हमेशा आदम और हौव्वा विद्यमान रहते  हैं |आज भी घर में सबसे अधिक बाथरूम और बेडरूम सजाने में  ध्यान दिया जाता है |जिव की इसी नग्न अवस्था का नग्न सत्य है की वह 
परमेश्वर से दूर ही रहता है , उसके पास  तो मजबूरी में जाता है | कई बार वह नंगई से प्राप्त हिस्से में कुछ देने वहाँ जाता है |
                   अब तो अप समझ गए होंगे की नंग  , परमेश्वर   से बड़ा है |आईये , नंग की सत्ता को  साष्टांग दंडवत करें |नंग की पूजा , अर्चना ,करें |वंदना करें | लेखकों , कवियों को चाहिए नंग महिमा पर गीत लिखें , भजन ,कीर्तन लिखें | उनकी आरती लिखें |
                 कलियुग का परमेश्वर ही नंग है या नंग ही परमेश्वर है |'होरी' की सीख है अप गीत , ग़ज़ल दोहे नहीं अपितु नंग पर खंड और महाकाव्य लिखें |इश्वर ने तो लक्ष्मी  और सरस्वती  का वैर बनाये रखा  ,पर नंग कृपा से इहलोक और परलोक  दोनों बन जायेगा  |देश  के एक वरिष्ठ कवि श्री हरिपाल सिंह जो 86 के हो कर जवान हैं..... अर्थात .....
अज कल नंग महिमा पर ' सूरसागर' और 'होरी काव्य सागर' की तर्ज पर "नंग काव्य सागर " लिख रहे हैं |उनका दावा है कि इसका पठन पाठन घर ,घर होगा| यह भी दावा है कि यह किताब  कोर्ष में चलेगी |'होरी' कि उन्हें शुभ कामना है कि वह किसी नंग के दरबार में 'नौरत्न ' कि तरह शोभा पावें |
                  नंग महिमा का अंतिम अध्याय समाप्त |
    सब एक साथ बोलो ... नंग महराज कि जय |  
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                                                  राज कुमार  सचान   'होरी'                                                                                   

Thursday, July 21, 2011

Raj Kumar Sachan 'HORI': nang mahima [part two] ...hori khadaa bazaar mn.

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Raj Kumar Sachan 'HORI': nang mahima [part two] ...hori khadaa bazaar mn.: " संक्षेप में उपसंहार स्वरुप कहा जा सकता है की ईश्वर की सम्पूर्ण वस्तुएं नंग दरबार में धड़ल्ले से पायी जाती हैं , परन्तु नंग दरबार की स..."

nang mahima [part two] ...hori khadaa bazaar mn.

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 संक्षेप में उपसंहार स्वरुप कहा जा सकता है की ईश्वर की सम्पूर्ण वस्तुएं नंग 
दरबार में धड़ल्ले से पायी जाती हैं , परन्तु नंग दरबार की समस्त वस्तुएं .
सुविधाएं ईश्वर को भी नसीब नहीं | इस द्रष्टि  से नंग दरबार ईश्वर दरबार से उच्च स्थान पर है | आधुनिक साज सज्जाओं से सुसज्जित है | श्रेष्ठ है |
                    अब आयें दोनों की शक्तियों , रूपों की तुलना भी करलें .........
ईश्वर विभिन्न रूपों ...साकार और निराकार  मिलते हैं , नंग भी बहुरूपधारी
वह भी साकार , निराकार दोनों है |दोनों के विभिन्न रूपों  की पूजा होती है |दोनों हर कहीं कण कण में व्याप्त हैं |दोनों ही द्रश्य और अद्रश्य शक्तियों वाले हैं |दोनों के ही भय से संसार के प्राणी डरते हैं |ईश्वर को तो लोग हलके में भी ले लेते हैं ,पर नंग से तौबा ! लोग तो लोग उनके कुटुंब कांपते हैं | लोगों के अंग अंग कापते हैं |अंग अंग के रोयें  शिहर शिहर कर रोने लगते हैं |
                              दोनों श्रजन , पालन और संहार करते हैं |दोनों एक साथ त्रिदेव हैं |म्रत्यु देने की शक्ति में नंग ईश्वर से बीस है |म्रत्यु देने की भाँती भाँती की रीतियाँ हैं |तुरंता म्रत्यु  के साथ साथ तड़पा , तड़पा कर म्रत्यु देने में दोनों बराबर के मित्र हैं |हाँ , तड़पाने वाली म्रत्यु नंग को विशेष  प्रिय है  ,उसका 
प्रिय शगल है |
                                    'होरी' दोनों की कथा अनंत है | हरि अनंत हरि कथा अनंता की ही भांति 'नंग अनंत , नंग कथा अनंता |दोनों की कथाओं के अध्यन और शोध से मैं  पी एच डी कर  इश्वरी और नंगई दोनों में डाक्टर बनना चाहता
था |नंग बड़ा की  परमेश्वर  पर मुझे निष्कर्ष देना था |निष्कर्ष स्वरुप 'होरी' यह प्रतिपादित करता है की नंग भले ही सतयुग, त्रेता, द्वापर में परमेश्वर से 
पीछे रहा हो परन्तु कलियुग में नंग ने निर्णायक बढ़त  प्राप्त कर ली है |
                                      परमेश्वर श्रेष्ठता  और वर्चास्वा की लड़ाई में नंग से हर गया है | ईश्वर मंदिरों , मस्जिदों, चर्चों , गुरुद्वारों तक सीमित रह गया है |
नंग तो गली , गली , नुक्कड़ , नुक्कड़ में कण कण में व्याप्त है |उसकी पूजा , अर्चना रात दिन अबाध चलती रहती है |
                                              कभी अपने जाना की नंग से ईश्वर बाज़ी क्यों हार गया ?यह शोध भी मैंने किया है |जब  जीव स्वर्ग में जन्म के पूर्व ईश्वर 
के समीप होता है तब वह केवल ईश्वर को ही जानता है , नंग को नहीं |अब 
ईश्वर उसे जन्म लेने के लिए संसार में भेज देता है |ईश्वर जीव का साथ छोड़ देता है जीव जन्म के समय रोता है ,चिल्लाता है .....उसकी नज़र में ईश्वर दिखाई नहीं पड़ते , पर देखता है अपने को नग्न ,नंग धडंग |उसने देखा जीव जन्म से ही नंगा है ,व्श्त्र  विहीन है |नंगई उसके अन्दर तक घर कर जाती है ,
वह मुस्कराने लगता है ... बच्चा बचपन में पहला पाठ ही नंगई का सीखता है 
                                    [क्रमशः ......]
                                                             राज कुमार सचान 'होरी'


Monday, July 18, 2011

aatanki dohe

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                                                                                                     आतंकी दोहे 
                                          जब कसाब   का  जन्म दिन ,  उसी  दिवस   आतंक  |
                                           मार दिया   आतंक   ने  पुनि     मुम्बई    में  डंक ||
                                         ****************************************************
                                         हम   कसाब    आतिथ्य  में ,    चढ़ा    रहे    हैं  भोग |
                                          अरबों    रूपये     चढ़    गए ,  हम  भारत   के  लोग ||
                                           ***************************************************
                                           सदा  गुरू   को  मानते   , गुरु   पूर्णिमा    बखान |
                                            तभी   यहाँ   अफज़ल   गुरू ,  पाते      हैं सम्मान ||
                                             *****************************************************
                                                                          राज कुमार   सचान 'होरी'  
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kurmikshatriyamahaasangh.blogspot.com                                                                              'कुर्मी' के  शेर 
न  हम    पहले   ही    सुधरे  थे , न   कोई  अब       इरादा  है ,
भला करना    तुम्ही  भगवन  ,कि अब   कुर्मी   का क्या होगा ?
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यह    पता   हम  को  नहीं   ,  कि हम  मुह   क्यों   चुराते   हैं ,
'कुर्मी'  क्या    कुर्मी    कहो ...कच्छप    की   कुंडली     पाली ?
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क्षत्रिय   हम  बनते  तो  हैं    पर  लड़   न   पाते    आज  हम  ,
'कूर्मि'   हम    बस   रक्त   रंजित  , बिन     लड़े    होते   रहे |
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मैं    ही  नेता    और    बस    मैं    ही    समर्थक       स्वयं    का  ,
'कूर्मि'  यह    ही    कुर्मियों      का  राजनीतिक     मन्त्र        है |
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कभी  तो  साथ  मिल  कर  के ,  कि छप्पर    छा     लिया होता  ,
कूर्मि    सदियों      से    युहीं     ,  छप्पर      बिना  रहते    रहे  |
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   सब   कहें   अपनी   यहाँ    ,   सुनते    नहीं     फिर     और   की  ,
'कूर्मि'   इस    कुर्मीपने        से ,     हम   रसातल     आ     गए  |
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                                                                    'कूर्मि'
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Friday, July 15, 2011

FIGHTING TERRORISM

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I  HAD   WRITTEN A BOOK  ' HAM  BHAARAT  KE  LOG'  PUBLISHED   BY   'MEDHA  PUBLICATIONS'  NEW  DELHI,  IN   WHICH   THERE   ARE  SEVERAL  SERIOUS   AND  IMPORTANT TIPS
TO FIGHT    TERRORISM.  IT  IS  MY  HUMBLE   REQUEST  TO  ALL  WHO  ARE  SERIOUS TO GO
THROUGH THIS   BOOK  AND   MOTIVATE  /MOBILIZE  THE PERSONS  IN POWER.
                              WITH  THANX.
                                                                   YOURS
                                                                                     RAJ KUMAR  SACHAN 'HORI '  

Friday, July 08, 2011

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NANG MAHIMA ...'HORI KHADAA BAZAAR MEN'

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                              नंग  महिमा ...."होरी खडा बाज़ार में "

    'होरी' अपने जन्म से ही बाज़ार में खड़े ,खड़े यह देख देख परेशान ,हैरान है कि नंग का  बाज़ार में ज्यादा रोब , हनक ,खनक ,झनक ,गनक है पर बाज़ार में ईश्वर की वह  बात नहीं है |

      ईश्वर के द्वार में  लोग माथा झुकाते हैं और मन ही मन बुदबुदाते हैं फिर हताश ,निराश ,दुखी-दुखी उसी तरह शाश्वत बुदबुदाते चले जाते  हैं |वह तो भला हो कोढ़ी , भिखमंगे ,अधनंगे ,कटोरा लिए स्थायी रूप से स्थापित भक्तों का और अपने काम में सिद्धाहश्त पुजारियों का , कि ईश्वर का दरबार चल रहा है , नहीं तो .......

उधर नंग दरबारों कि महिमा ही न्यारी है |भक्त सीना फुलाए आते हैं और सीना चौरियाये ही जाते हैं |इनके दरबार सजे हैं |हर गली नुक्कड़ में | ईश्वर के लिए इतने रास्ते नहीं जितने नंग द्वार हैं| हर रास्ता वहीँ जाता है , वहीँ से आता है 

                                अब आज 'होरी कि समझ में आया कि लोग सदियों से नंग से ईश्वर कि तुलना क्यों करते आये हैं ?क्यों कहते आये हैं कि ...."नंग  बड़ा ,परमेश्वर ??"

आईये हम भी कुछ साम्य और कुछ वैषम्य तलाशें |ईश्वर के दरबार में चढ़ने वाले सारे चढ़ावे,फूल प्रशाद ,पत्त्रम पुष्पं .........नंग को भी स्वीकार्य हैं , ये समस्त चढ़ावे नंग दरबार में भी श्रद्धा से चढ़ते हैं |ईश्वर कि भाँती ही नंग दरबार में भी नारी को विशेष दर्ज़ा प्राप्त है ,दोनों दरबारों में नारियों कि पूजा होती है |बल्कि नंग दरबार में नारियों की पूजा कुछ अधिक ही सम्पूर्ण कर्मकांडों के साथ पुरे रीति रिवाज से होती है |दोनों दरबारों में गर्भगृह तक पहुँच में नारी भक्त आगे हैं |

                                        प्रार्थना ,आरती ,धूप दीप , भजान ,कीर्तन ,भोजन सबके सब भी ईश्वर की भाँती ही नंग को भी विशेष पसंद हैं |चावल ,अक्षत  ,नैवेद्य भी |बल्कि 'अक्षत' तो नंगों को विशेष प्रिय है |'अक्षत' पर नंग की कृपादृष्टि रहती है |ईश्वर के विशेष , दिनों ,पर्वों की तरह नंग के भी पर्व मनते हैं|ईश्वर के हाथों में पुष्प ,पुस्तक ,वाद्य यंत्र ,अश्त्र शश्त्र होते हैं ,ठीक इसी तरह नंग के अनेक हाथ होते हैं और हर हाथ में अश्त्र शश्त्र होते हैं |हाँ ,नंग के वाद्य यंत्र ,अश्त्र शश्त्र अधिक आधुनिक होते हैं |जिसका चाहें जब चाहें बाजा बजा दें |ईश्वर के हाथों के अश्त्र शश्त्र ...वही पुराने तीर , तलवार ,भाला ,त्रिशूल परन्तु नंग के हाथों में रायफल ,रिवाल्वर ,पिस्टल ,एके ४७ ,बम,मिसाईल आदि आदि अत्याधुनिक अश्त्र शश्त्र मिलते हैं |इन्हें वे विशेष कृपापात्र भक्तों को भी परशाद स्वरुप देते हैं |   [कृमशः ........]

                                          राज कुमार सचान 'होरी' 

HORI KHADAA BAZAAR MEN

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'नंग   महिमा'

 

Thursday, July 07, 2011

Tuesday, July 05, 2011

NANGAYI KE DOHE

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सत्ता   लख  कर  नंग की , 'होरी'    अतिशय दंग  |
अब  भी   बड़ा      जहान  में  ,  परमेश्वर      से नंग  ||
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मैं   समाज   पर  क्या  करूँ , इससे  भारी    व्यंग्य  |
नंग  , नंग  मिल -मिल करें , भाँति ,भाँति सत्संग ||
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'होरी'   नंगे       हैं    खड़े   , ले     कर     जूता     हाथ |
सज्जन सज्जनता  लिए  , खड़े    झुका कर   ,माथ ||
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'होरी'   माना    व्यर्थ   अब , जाना    ईश्वर     द्वार |
अब  तो नंगों     द्वार  पर  , 'होरी'     हो     उद्धार ||
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कलियुग  भी    करने  लगा ,    खड़े  , खड़े  फ़रियाद |
'होरी'     खाएं   शर्म   अब    ,  बड़े   , बड़े    जल्लाद ||
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नंगों   का   आँगन   यहाँ   ,  नंगों      की     चौपाल |
'होरी'   आज  बज़ार   में  ,     खड़े   ,खड़े    बेहाल ||
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नंगा अब     राजा  हुआ ,    नंग   हुए   अब   संत  |
'होरी'  यह    आरम्भ     है  ,    कैसा  होगा       अंत ||
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राजा   है   ध्रतराष्ट्र  अब    , मुंशिफ    हुआ    मदांध |
'होरी'     चल   परदेश     अब  ,   घर  में     बहुत सड़ांध ||
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वे     ही तो     भगवान्     अब  ,   वे   ही     अपने    राम    |
'होरी'    खड़ा      बज़ार     में   ,   करता   नंग      प्रणाम ||
###########################################
काले   तो     नंगे    चलो   , यहाँ     श्वेत    अब     नंग  | 
सप्त रंगों     की    नंगई  ,    लख   अब   'होरी'  दंग      ||
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आँखों    पट्टी  बाँध   कर   ,  आज    कर   रहे    न्याय  |
'होरी'  फरियादी   कहो   ,  कहाँ ,    कहाँ     अब    जाय ||
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शब्द    शब्द  में   दंश  हैं   ,   बात  ,   बात   में      घात |
यह    प्रभात   है    तो   चलो  , इससे     अच्छी    रात ||
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                                    राज  कुमार   सचान  'होरी' 

Saturday, July 02, 2011

GANGA SAFAAYI ABHIYAAN.....'HORI KHADAA BAZAAR MEN'[8]

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गंगा हमारी सर्वाधिक पवित्र  नदी और  सभ्यता तथा संस्कृति की आधारशिला है |इसे भगीरथ तब लाये जब उनके पुरखे मर खप कर
बिना तरे  नरक में पड़े थे |भगवान् शंकर को रिझाया ,मनाया , फुसलाया , हिमालय में  तपस्या की  , ब्रहम्मा को खुश किया ,तब कहीं कमंडल से बाहर निकलीं |
                                           इतनी मान मनौवल से , इतने नखरों से
गंगा जी भारत में आयीं थीं , तभी भगीरथ और  गंगा जी में गाँठ
शुरुआत से  ही पड़  गयी थी जो भगीरथ  के वंशजों के समय कलयुग
आते ,आते  बहुत बड़ी हो गयी  |गंगा ने हमारे पुरखों को तो तार दिया , लेकिन गंगा जी को  तारने का हमारा काम  उसके बाद शुरू
हुआ जो आज तक बदस्तूर जारी है  |
                                           करोड़ों भारतवासी , एक बेचारी गंगा ,
तारते, तारते खुद तरी जा रही है  |सतयुग में हमारी संख्या कम थी ,पर 
अब  कलियुग में  हम १२५ करोड़ से  अधिक तो  देश मेंही हैं ,बाकी अनिवाशी
भारतीय , सब मिलकर पूरी ताकत से  गंगा  सफाई के झांसे में गंगा
को रख कर गंगा मैया की महिमा गाते हैं  ,आरती करते हैं ,पूजा
करते हैं |अब  हमारी पूजा में तो कोई खोट है नहीं , जो गंगा जी पुजते ,पुजते  पतली हुयी  जा  रही  हैं  , हम भारतीयों के प्यार तले
पीली हुयी  जा रही हैं  |
                                               हम  भारतीय  सफाई का सही अर्थ लगाते हैं , हमने कहावत बना रखी  हैं ....'हाथ की सफाई ','जेब की सफाई 'वही  , ठीक वही  तो हम  कर  रहे हैं  , गंगा की सफाई |हमारे
पितामह भीष्म हुए ,उनकी प्रतिज्ञां  के  हम सदियों से कायल हैं ,
हमने भीष्म प्रतिज्ञां  की  प्रतिज्ञां  की  है , हम गंगा की सफाई करके
मानेंगे ,पूर्ण सफाई  |इतिहास गवाह है ...हमने सरश्वती नदी की भी
पूर्ण सफाई  की  है  , सरस्वती की महिमा  हमी ने गाई ,अब गंगा महिमा सम्पूर्ण वेग से गा रहे हैं , जब तक गंगा मैया रहेंगी ,हम
गायेंगे |हम सच्चे सपूत हैं  |
                                      हमने गंगा पर बड़े ,बड़े शोध किये , कहा कि उसके पानी में कीड़े नहीं पड़ते , बक्तीरिया नहीं पड़ते ,इसी लिए
हम नाले ,नाली क्या परिवार ,समाज की सारी  गंदगी उसमें निश्चिंत हो कर डालते रहते हैं भला गंगा कभी मैली होगी ?ज़िंदा तो ज़िंदा
मुर्दे भी अपनी गंदगी उसी में  डालते  हैं  ,जिन्दे ,मुर्दे दोनों नहाते हैं |
हम भारतीय सच्चे सपूतों की तरह मां  की गोद में रहते हैं |
                                         हम गंगा सफाई  अभियान चलाये जा रहे हैं और तब तक चलाते रहेंगे , जब तक गंगा  में पानी रहेगा ,गंगा मैया रहेंगी |गंगा जी की पवित्रता की सौगंध हम देश का सारा पैसा
उनकी सफाई  में  लगा देंगे ,जब तक हमारे हाथों की सफाई में दम है , ताकत है |आखिर गंगा हमारी मां है , उनके प्रसाद से हमारा
जीते जी और मरने के बाद उद्धार होगा |
                                              हम गंदगी भी डालेंगे और  सफाई भी करेंगे |गंगा कभी गन्दी नहीं होतीं |वह सबको तारती हैं ,मुर्दों ,नालों
नालियों सभी को |दुनिया की सबसे पवित्र नदी ,फिर हम सफाई का
भी तो ख्याल रखते हैं  , अरबों रूपये पानी की तरह  बहाते हैं |मां बेटा एक दूजे पर आश्रित ,इसी को तो कहते हैं  .....अन्न्योंन्याश्रित
सम्बन्ध |
                                'होरी' आज कुम्भ के मेलों  में  खडा है ,गंगा के किनारे लगने वाली बाज़ारों में खडा है ... गंगा के किनारे खड़े , खड़े 
देख रहा है गंगा जी को साफ़ होते ,सरस्वती  जी की तरह |
                                                  राज कुमार सचान 'होरी' 

Thursday, June 30, 2011

ANNAA JI

1 टिप्पणियाँ
भ्रष्टाचारी    खेल    मिटायें   , अन्ना जी |
नव आशा का दीप जलाएं ,  अन्ना जी  ||
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अर्थ क्षेत्र   में    भ्रष्ट  आचरण   माना है ,
अन्य  क्षेत्र    के  भेद     बताएं ,   अन्ना  जी  |
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राजनीति , नौकरशाही पर उठें  उंगलियाँ ,
अपनों पर  ऊँगली    उठायें , अन्ना जी |
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कुछ अपनी तो कुछ औरों की भी  मानें  ,
नाहक  जिद्दी  रूप     दिखाएँ   , अन्ना  जी  |
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'होरी' तानाशाही    होती     बहुत  बुरी    ,
तानाशाही      भाव    भगाएं    , अन्ना  जी  |
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                              राज कुमार सचान  'होरी'
 

'RAJ NEETI'...[HORI KHADAA BAZAR MEN]8

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Tuesday, June 28, 2011

RAAJAA JI

1 टिप्पणियाँ
भ्रष्टाचारी खेल खिलाएं , क्या कहने हैं राजा जी ?
टेबल नीचे  हाथ    मिलाएं , क्या कहने  हैं   राजा  जी ?
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सोने    चांदी   के   प्यालों    में   तख़्त    नशीं      हो ,
दारू ,दारा  पियें     पिलायें , क्या कहने हैं राजा जी ?
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अपने   ही   क़ानून    और    अपनी           धाराएं, 
अंधे  पीसें   कुत्ते     खाएं , क्या कहने हैं  राजा जी ?
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आँखों   वाले      रोयें  दीदा    फाड़ , फाड़       कर  ,
'होरी'  अंधे   गाना    गायें ,क्या  कहने  हैं  राजा जी ?
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                            राज कुमार सचान 'होरी'